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Posts archive for: April, 2008
  • दिल से इन्तेकाम

    जब कभी तेरा नाम लेते हैं
    दिल से हम इन्तेकाम लेते है

    मेरी बर्बादियों के अफ़साने
    मेरे यारों का नाम लेते हैं

    बस यही एक जुर्म है अपना
    हम मुहब्बत से काम लेते हैं

    हर कदम पर गिरें मगर सीखा
    कैसे गिरतों को थाम लेते हैं

    हम भटक कर जुनूं कि राहों मे
    अक्ल से इन्तेकाम लेते है

    जब कभी तेरा नाम लेते हैं
    दिल से हम इन्तेकाम लेते है

  • दर्द अपनाये कौन

    दर्द अपनाता है पराये कौन
    कौन सुनता है और सुनाये कौन

    कौन दोहराए पुरानी बातें
    गम अभी सोया है जगाये कौन

    वो जो अपने हैं, क्या वो अपने हैं
    कौन दुःख झेले, आजमाये कौन

    अब सुकून है तो भूलने में है
    लेकिन उस शख्स को भुलाये कौन
    दर्द अपनाता है पराए कौन

    आज फिर दिल है कुछ उदास-उदास
    देखिए आज याद आये कौन
    दर्द अपनाता है पराए कौन
    कौन सुनता है और सुनाये कौन

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