क़दम क़दम पे सहारों ने साथ छोड दिया
पड़ा जो वक़्त तो यारों ने साथ छोड़ दिया

बुझी जो शमा तो परवाने हो गए रुखसत
हुई सहर तो सितारों से साथ छोड़ दिया

वो बे-नकाब हुए फिर नज़र उठा न सके
उठी नज़र तो नज़ारों ने साथ छोड़ दिया

फलक के चांद सितारों से क्या गिला करना
ज़मीन के चांद सितारों ने साथ छोड़ दिया

अब इश्क़ है न तबस्सुम न ज़िंदगी है न मौत
ज़फर आज तो यारों ने साथ छोड़ दिया